यूपी में गोरखपुर से भाजपा का बड़ा दांव नितिन नवीन की 4-5 नवंबर को 'सेव डेमोक्रेसी रिमूव एनार्की' पदयात्रा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज से एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आज यानी 4 नवंबर और कल 5 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में बड़ी पदयात्रा करने जा रहे हैं। इस पदयात्रा का नाम दिया गया है - *सेव डेमोक्रेसी रिमूव एनार्की*, यानी लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ।
भाजपा का सीधा आरोप है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के नाम पर झूठ फैला रही हैं। दोनों पार्टियां लोगों को गुमराह करके लोकतंत्र को कमजोर कर रही हैं। भाजपा इसी झूठ का पर्दाफाश करने के लिए सड़क पर उतर रही है।
गोरखपुर ही क्यों चुना?
गोरखपुर को भाजपा ने यूं ही नहीं चुना। ये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है। योगी यहां से 5 बार सांसद रह चुके हैं और गोरखनाथ मठ के महंत हैं। यहां से भाजपा कभी चुनाव नहीं हारी। इसीलिए इसे भाजपा का सबसे मजबूत किला माना जाता है।
नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद ये उनकी पहली बड़ी पदयात्रा है। वे बिहार के युवा नेता हैं और संगठन के बड़े जानकार माने जाते हैं। भाजपा ने उन्हें अध्यक्ष बनाकर युवा और पिछड़ा वर्ग दोनों को साधने की कोशिश की है। गोरखपुर से वे यूपी के 75 जिलों के कार्यकर्ताओं को एक ही संदेश देना चाहते हैं - 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दो, बाद में वक्त नहीं मिलेगा।
पदयात्रा का रूट करीब 5 किलोमीटर का रखा गया है। ये गोरखनाथ मंदिर से शुरू होकर घंटाघर, गोलघर, शास्त्री चौक होते हुए टाउनहॉल पर खत्म होगी। रास्ते में 10 जगहों पर स्वागत सभाएं होंगी। हर सभा में स्थानीय विधायक, सांसद और बूथ अध्यक्ष मौजूद रहेंगे।
पदयात्रा का असली मकसद - एसआईआर पर फैलाया जा रहा झूठ
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने बताया कि इस पदयात्रा का मुख्य मकसद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का जवाब देना है। दरअसल, यूपी समेत कई राज्यों में वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर चल रहा है। चुनाव आयोग 12 नवंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा और 4 जनवरी को फाइनल लिस्ट आएगी।
कांग्रेस और सपा का आरोप है कि भाजपा सरकार ने जानबूझकर यादव, मुस्लिम और दलित वोटरों के नाम काट दिए हैं। भाजपा का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।
भाजपा के मुताबिक, एसआईआर में सिर्फ 3 तरह के नाम काटे जा रहे हैं। पहला - जो लोग अब इस दुनिया में नहीं हैं। दूसरा - जो लोग दो जगह वोटर हैं, यानी डुप्लीकेट वोटर। तीसरा - जो लोग यूपी से बाहर चले गए हैं। भाजपा का दावा है कि यूपी में 11 लाख से ज्यादा ऐसे वोटर मिले हैं जो पलायन कर चुके हैं। अब कांग्रेस इन्हीं फर्जी वोटरों के सहारे चुनाव जीतना चाहती है। नितिन नवीन अपनी सभा में इसी का सबूत रखेंगे।
अखिलेश का वार रूम और कांग्रेस की तैयारी
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी चुप नहीं बैठी हैं। कांग्रेस ने हाल ही में अपने वार रूम का हेड सचिन यादव को बनाया है, जो अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस का प्लान है कि 403 विधानसभा सीटों पर बूथ स्तर तक वकीलों की टीम लगाई जाए, जो वोटर लिस्ट की जांच करेगी।
सपा का कहना है कि वो हर बूथ पर अपने कार्यकर्ता तैनात करेगी ताकि एक भी सही वोटर का नाम न कटे। मतलब साफ है, यूपी में अब वोटर लिस्ट ही सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
पदयात्रा के बाद नितिन नवीन गोरखपुर में संगठन की बड़ी बैठक भी लेंगे। इसमें सभी 6 क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्ष और सभी जिलाध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में बूथ सशक्तिकरण और सदस्यता अभियान पर चर्चा होगी।
गोरखपुर में सुरक्षा और ट्रैफिक
पदयात्रा को देखते हुए गोरखपुर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पूरे रूट पर पुलिस तैनात रहेगी। ट्रैफिक को भी कुछ घंटों के लिए डायवर्ट किया जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अगर जरूरी न हो तो इस रूट पर जाने से बचें।
कुछ सवाल-जवाब
सवाल नितिन नवीन की पदयात्रा कब और कहां हो रही है?
जवाब ये पदयात्रा 4 और 5 नवंबर 2026 को गोरखपुर में हो रही है। ये गोरखनाथ मंदिर से टाउनहॉल तक 5 किलोमीटर लंबी होगी।
सवाल पदयात्रा का नाम क्या है?
जवाब इसका नाम 'सेव डेमोक्रेसी रिमूव एनार्की' यानी लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ रखा गया है।
सवाल गोरखपुर को क्यों चुना गया?
जवाब गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ है और भाजपा का सबसे मजबूत किला है। यहां से यूपी की 403 सीटों को संदेश देना आसान है।
सवाल यूपी में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट कब आएगा?*
जवाब चुनाव आयोग 12 नवंबर को यूपी में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी करेगा और 4 जनवरी को फाइनल लिस्ट आएगी।








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