अब मतदाता पत्र से मिलेगा योजनाओं का लाभ राहुल गांधी ने वीडियो दिखाकर भाजपा को घेरा

30 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में People's Plan Campaign 2026-27 की राष्ट्रीय कार्यशाला हुई। इसी में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह एक सरकारी कार्यक्रम में बोलते हुए दिखाई दिए।
उन्होंने कहा, अब लाभार्थियों को भुगतान का आधार आधार पत्र नहीं होगा। आधार पत्र तो गली-गली में पाँच मिनट में बन जाता है।
अब सभी योजनाओं के भुगतान का आधार बायोमेट्रिक और ईपीआईसी संख्या होगी, अर्थात् मतदाता पहचान पत्र होगा।
बस, यहीं से विवाद आरम्भ हो गया।
राहुल गांधी ने क्या किया?
राहुल गांधी ने विलम्ब नहीं किया। 6 नवम्बर 2026 को उन्होंने तुरंत उसी पुराने वीडियो को अपने एक्स खाते पर साझा कर दिया।
साथ में उन्होंने लिखा, "मोदी सरकार के मंत्री की घोषणा सुनिए। योजनाओं का लाभ अब आधार से नहीं, मतदाता पहचान पत्र से मिलेगा। साजिश बहुत गहरी है, ध्यान से समझिए।
उनका कहना था, यह केवल नियम का परिवर्तन नहीं है। यह उस खेल का भाग है, जिसमें पहले मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं।
राहुल गांधी की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में एक ऐसी बात लिखी, जिसे पढ़कर सामान्य नागरिक भी चिंता में पड़ गया।
उन्होंने कहा, एसआईआर के नाम पर करोड़ों लोगों के नाम काटे जा रहे हैं।
अब विचार कीजिए, यदि किसी का नाम मतदाता सूची में नहीं है और उसी सूची से योजनाओं का पैसा भी मिलेगा, तो उसका क्या होगा?
न उसका मत बचेगा, न उसका अधिकार बचेगा।
राहुल गांधी ने सीधा प्रश्न पूछा, "आज पंचायती योजना है, क्या कल राशन भी इसी से जुड़ जाएगा? पेंशन? मनरेगा? आवास? छात्रवृत्ति? आरक्षण?"
उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा, वोटर लिस्ट निष्पक्ष चुनाव आयोग के हाथ में होनी चाहिए, मगर अब वो मोदी सरकार के कर्मचारी, ज्ञानेश कुमार के हाथ में है।
राहुल ने इसे वोट चोरी नहीं, *हक़ चोरी* कहा। उन्होंने लिखा - "नाम कटा - वोट गया। वोट गया - हक़ गया।"
सरकार का पक्ष क्या है?
दूसरी ओर सरकार के समर्थक कह रहे हैं कि इसमें घबराने की कोई बात नहीं है।
उनका तर्क है, आधार पत्र का दुरुपयोग बढ़ गया है, इसलिए उस पर पूर्ण भरोसा नहीं किया जा सकता।
मतदाता पहचान पत्र और बायोमेट्रिक अधिक विश्वसनीय हैं। इससे फर्जी लोग पकड़े जाएँगे और वास्तविक लाभार्थी को ही पैसा मिलेगा।
यह बात भी अपने स्थान पर सही प्रतीत होती है।
एक ज़रूरी सच्चाई जो आपको पता होनी चाहिए
यहाँ एक बात साफ़ समझ लीजिए, ताकि कोई आपको भ्रमित न करे।
ललन सिंह ने यह बात सिर्फ पंचायती राज की नई योजना - पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना के लिए कही थी।
अभी पीएम-किसान, आवास योजना, पेंशन जैसी बड़ी योजनाओं में आधार ही चल रहा है। पंचायती राज मंत्रालय की वैसे भी कोई ऐसी योजना नहीं है, जो सीधे लाभार्थी के खाते में पैसा भेजती हो।
इसलिए अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन सवाल पूछने की ज़रूरत ज़रूर है।
कुछ सवाल-जवाब
सवाल ललन सिंह ने क्या कहा?
जवाब उन्होंने 30 अक्टूबर को कहा, अब पंचायती राज योजनाओं का पैसा आधार पत्र से नहीं, मतदाता पहचान पत्र के EPIC नंबर + बायोमेट्रिक से मिलेगा।
सवाल राहुल गांधी ने क्या कहा?
जवाब उन्होंने 6 नवंबर को कहा, यह गहरी साजिश है। मतदाता सूची से नाम काटे जा रहे हैं और अब उसी सूची से योजनाओं का लाभ मिलेगा। नाम कटा - वोट गया, वोट गया - हक़ गया।
सवाल ईपीआईसी संख्या क्या है?
जवाब यह मतदाता पहचान पत्र पर लिखी संख्या है, जिससे मतदाता सूची में पहचान होती है।
सवाल एसआईआर क्या है?
जवाब यह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसमें सूची की जाँच होती है और गलत नाम हटाए जाते हैं।








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