हिमाचल में सियासी महासंग्राम 2027 से पहले लोकतंत्र पर घमासान

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजनीति इस समय दो बड़े मुद्दों पर उलझी हुई है - एक नया जिला बनाने का दांव और दूसरा लोकतंत्र बचाने के नाम पर सड़कों पर उतरना। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
नए जिले बनाने का दांव - सुक्खू का 2027 वाला मास्टरस्ट्रोक?
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 14 अक्टूबर को एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने रिटायर्ड जज धर्म चंद चौधरी की अध्यक्षता में एक कमीशन बनाया है, जो 6 महीने में रिपोर्ट देगा कि हिमाचल में नए जिले, तहसील और सब-डिवीजन कहां बन सकते हैं।
हिमाचल में आखिरी बार 1972 में जिले बने थे, जब कांगड़ा को तोड़कर हमीरपुर और ऊना बनाए गए थे। अब 54 साल बाद फिर से यह कवायद शुरू हुई है।
सुक्खू का कहना है कि पहाड़ी राज्य में लोगों को सरकारी दफ्तर तक पहुंचने में 100 KM चलना पड़ता है, इसलिए नए जिले जरूरी हैं। लेकिन बीजेपी इसे सीधा चुनावी स्टंट बता रही है। बीजेपी का आरोप है कि राज्य पर 1.20 लाख करोड़ का कर्ज है, ऐसे में नए जिले बनाना सिर्फ वोट बटोरने का तरीका है। सबसे ज्यादा चर्चा कांगड़ा जिले को तोड़ने की है, जिसमें 15 विधानसभा सीटें हैं और जो पूरे हिमाचल की सत्ता तय करता है।
लोकतंत्र बचाओ vs वोट बचाओ - हिमाचल में भी दिल्ली वाली जंग
जैसे राजस्थान में हो रहा है, वैसे ही हिमाचल में भी 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' और 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे आमने-सामने हैं।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने 4 बड़ी पदयात्राओं का ऐलान किया है। धर्मशाला में 30 अक्टूबर को, शिमला में 1 नवंबर को, और मंडी-हमीरपुर में 4 नवंबर को। शिमला वाली रैली में असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा चीफ गेस्ट होंगे, साथ में जयराम ठाकुर और अनुराग ठाकुर भी रहेंगे।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस SIR यानी वोटर लिस्ट की सफाई का विरोध करके बांग्लादेश जैसी अस्थिरता पैदा करना चाहती है।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा है कि 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली महारैली में हिमाचल से 20,000 लोग जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई 1942 के Quit India आंदोलन जैसी है और जब तक CEC ज्ञानेश कुमार नहीं हटते, आंदोलन चलता रहेगा।
सुक्खू का तीखा हमला - BJP 5 गुटों में बंटी है
मुख्यमंत्री सुक्खू ने Kullu में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा - "बीजेपी 5 गुटों में बंटी हुई है, भविष्यवाणी कर रही है कि 2027 में 2/3 बहुमत से जीतेंगे। अरे जनता तय करेगी।
सुक्खू ने दावा किया कि उनके पास बीजेपी का इंटरनल सर्वे है, जिसमें बीजेपी के 28 में से 16 विधायक अगली बार हार जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछली बीजेपी सरकार ने 5 साल में 43,261 करोड़ का कर्ज लिया, जबकि उनकी सरकार ने 3 साल में 37,781 करोड़ ही लिया है और कर्मचारियों को DA भी दिया है।
उन्होंने 206 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया, जिसमें Pirdi में 28 करोड़ का पुल भी शामिल है।
2027 की असली तैयारी अभी से शुरू
हिमाचल में हर 5 साल में सत्ता बदलने की परंपरा रही है। 2022 में कांग्रेस जीती थी, तो 2027 में बीजेपी को उम्मीद है। इसलिए नए जिले बनाना, पदयात्राएं निकालना, दिल्ली रैली में भीड़ ले जाना सब 2027 की तैयारी का हिस्सा है।
लेकिन हिमाचल की जनता पहाड़ की तरह अडिग है। वह विकास देखती है, न कि सिर्फ नारे। चाहे सुक्खू के नए जिले हों या बिंदल की पदयात्राएं, अंतिम फैसला 2027 में जनता ही करेगी।








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