कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट का 31 अक्टूबर को AAP सरकार पर तीखा हमला, पंजाब की सियासत गरमाई

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने 31 अक्टूबर 2026 को आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार पर नशे के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला।
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या लगातार बढ़ रही है और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि 2022 में जब AAP सरकार बनी थी, तब उन्होंने पंजाब को नशा-मुक्त बनाने का बड़ा वादा किया था।
सचिन पायलट ने कहा, "आज 2026 खत्म होने वाला है, लेकिन जमीनी हकीकत में ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा है। आए दिन नशे से जुड़ी खबरें सामने आती हैं। यह पंजाब के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
पायलट ने उठाए ये बड़े सवाल
1. सरकार ने नशा-मुक्त पंजाब के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं?
2. नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए क्या कार्य योजना है?
3. युवाओं को रोजगार और खेल से जोड़ने के लिए क्या किया जा रहा है?
पायलट ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पंजाब के युवाओं के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक मुद्दा भी है।
सियासी मायने क्या हैं?
सचिन पायलट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब में कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। हाल ही में पंजाब कांग्रेस की बैठक में 4 नवंबर को संगरूर में बड़ी रैली की योजना पर चर्चा हुई थी। इस बैठक में खड़गे, राहुल गांधी और कई बड़े नेताओं के नाम सामने आए थे।
वहीं दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी भी 2027 की तैयारी में जुट गई है। सोशल मीडिया पर इन दिनों AAP की 40 संभावित उम्मीदवारों की एक सूची वायरल हो रही है। इस सूची में कई मौजूदा विधायकों के नाम बताए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी ने अभी तक इस सूची की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
AAP का पक्ष क्या है?
AAP सरकार का कहना है कि उन्होंने नशे के खिलाफ बड़े अभियान चलाए हैं। सरकार के अनुसार कई बड़े नशा तस्करों को पकड़ा गया है और युवाओं को खेल और रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव में नशा, बेरोजगारी और ड्रग्स का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा होगा। सचिन पायलट के इस बयान के बाद अब यह मुद्दा और ज्यादा गरमा गया है।
फिलहाल, पंजाब की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में AAP सरकार इस हमले का क्या जवाब देती है।








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