J&K में उमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ बगावत 24 MLA एक साथ बोले, कुर्सी हिल गई

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनने के 2 साल के अंदर ही सबसे बड़ी बगावत हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ उन्हीं के 24 विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। कुल 42 MLA में से 24 बागी, यानी आधी से ज्यादा पार्टी अब लीडरशिप से नाराज है।
रातों-रात कैसे भड़का विद्रोह?
30 अक्टूबर शुक्रवार को श्रीनगर में लोलाब के विधायक कैंसर जमशेद लोन के घर लंच मीटिंग बुलाई गई। बहाना था चाय-पानी, लेकिन अंदर 4 घंटे तक सीक्रेट प्लान बना। 18 विधायक खुद पहुंचे और 6 वीडियो कॉल से जुड़े।
ट्रिगर - 27 अक्टूबर का कैबिनेट विस्तार
उमर ने 27 अक्टूबर को 4 नाम जोड़े - अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ कालू। लेकिन 6 बार के विधायक मुबारक गुल और 2 बार के कई सीनियर छूट गए। विधायकों का कहना है - फैसला अब्दुल्ला परिवार की किचन में होता है, हमसे पूछा तक नहीं जाता।
बागियों की 5 मांगें
1. CM के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाओ।
2. डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी और 2 साल पूरे कर चुके मंत्रियों को हटाओ।
3. कश्मीर प्रोविंशियल प्रेसिडेंट शौकत अहमद मीर को हटाओ - वो पार्टी को गुमराह कर रहे हैं।
4. डाचीगाम डिक्लेरेशन लागू करो और स्टेटहुड + धारा 370 के लिए सड़क पर उतरो।
5. 2024 के चुनावी मेनिफेस्टो को टाइम-बाउंड लागू करो।
सरकार गिरेगी क्या?
नहीं। एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत गिराने के लिए 42 में से 28 का टूटना जरूरी है। अभी नंबर 24 है। उमर ने दिल्ली से अपने करीबी को भेजा था मनाने, लेकिन बागियों ने कहा - हमें सीधे सीएम से बात करनी है। फारूक अब्दुल्ला ने फोन घुमाए और कहा - डेढ़ साल बाद फिर रिशफल करेंगे।
अगले 4 दिन सबसे अहम
3 नवंबर को श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी अपनी MP सीट से इस्तीफा देंगे, वो पहले से ही पार्टी के खिलाफ हैं। 4 नवंबर को मुबारक गुल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। NC की तरफ से शौकत मीर ने कहा है - ये कोई बगावत नहीं, फ्रेंडली गेट-टुगेदर था। लेकिन अंदर की खबर है कि पार्टी पैनिक मोड में है।
जम्मू-कश्मीर में ये विद्रोह कुर्सी के लिए कम, सियासत की दिशा के लिए ज्यादा है।








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