राजस्थान में कल रात गांव-गांव में नहीं सोया कोई, 82% लोगों ने डाला वोट, एक बहू ने 11 को हरा दिया

कल का दिन राजस्थान के गांवों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं था।
सुबह से ही गांवों में हलचल थी। कोई चाय की दुकान पर बैठकर हिसाब लगा रहा था, तो कोई ट्रैक्टर पर बैठकर वोट डालने जा रहा था। औरतें भी सुबह-सुबह तैयार होकर बूथ पर पहुंच गई थीं। 5 नवंबर को 27 जिलों की 3716 पंचायतों में वोट पड़े।
लोगों ने इस बार दिल खोलकर वोट डाला। गांव वालों ने बता दिया कि उनको अपनी पंचायत से कितना प्यार है। हनुमानगढ़ में तो हाल ऐसा था कि हर 100 में से 92 लोग वोट डालने आ गए। लोग कह रहे थे, हमारी पंचायत है, हम ही तो चुनेंगे।
वोटिंग खत्म हुई तो काम खत्म नहीं हुआ। उसी रात गिनती शुरू हो गई। गांव के स्कूल में लाइट जल रही थी, बाहर लोग खड़े थे। कोई कह रहा था "हमारा वाला जीत रहा है", तो कोई कह रहा था "अभी रुको, अभी बहुत पर्ची बाकी है। सुबह 4-5 बजे तक भी कई जगह गिनती चलती रही।
अब बात करते हैं कल की सबसे बड़ी जीत की।
करौली जिले के गुडला गांव में एक बहू ने सबको हरा दिया। नाम है नैना धानका। गांव में इस बार सीट एसटी के लिए थी। गुर्जर समाज के लोगों ने सोचा, हमारी बहू को लड़ाते हैं। बस फिर क्या था, नैना ने ऐसा जोरदार प्रचार किया कि सामने वाले देखते रह गए।
गिनती होने पर नैना को 2107 वोट मिले। दूसरे नंबर वाले को सिर्फ 243 वोट मिले। मतलब पूरे 1864 वोट से जीत। मैदान में 11 लोग थे, लेकिन नैना के सामने कोई टिक ही नहीं पाया। गांव वाले अब कह रहे हैं, बहू ने तो कमाल ही कर दिया।
सीकर के छापर गांव की कहानी तो और भी मजेदार है। एक ही गांव की तीन बेटियों ने पहली बार चुनाव लड़ा और तीनों जीत गईं: पूजा वर्मा, मनीषा देवी और सुनीता वर्मा। तीनों अलग-अलग पंचायतों से जीतीं। अब गांव में हर कोई कह रहा है, "देखो, बेटियां किसी से कम नहीं हैं।"
सीकर के ही राजपुरा गांव में तो चुनाव ही नहीं हुआ। वहां सबने मिलकर पूजा कुमारी को सरपंच बना दिया। 7 वार्ड पंच भी ऐसे ही चुन लिए गए। गांव वालों ने कहा, "हम आपस में क्यों लड़ें? गांव एक रहेगा तो विकास होगा।" ऐसा गांव तो पूरे राजस्थान के लिए मिसाल है।
डीग के चंदूपुरा में कांटे की टक्कर हुई। जैकम खान ने 1467 वोट लेकर जीत हासिल की। सामने वाली को 954 वोट मिले। जीत का अंतर 513 वोट रहा। वहां भी रात तक लोग गिनती देखते रहे।
चित्तौड़गढ़ में भी कई रोचक नतीजे आए। हथियाना से कमला बाई जीत गईं। दमाखेड़ा में तो सिर्फ 25 वोट से फैसला हुआ। सोचो, 25 वोट से सरपंच बन गए। नगरी से भावना जीतीं। सलूंबर में देवी लाल ने 1347 वोट से जीत दर्ज की। जयपुर के ठीकरिया मीणान से मोती देवी मीणा जीत गईं।
अब तक राजस्थान की 14403 में से 10656 पंचायतों में चुनाव हो चुका है। अब सिर्फ एक चरण बचा है।
आज यानी 6 नवंबर को उपसरपंच का चुनाव हो रहा है। कल जो वार्ड पंच जीते हैं, वो मिलकर उपसरपंच चुनेंगे।
एक बात और समझ लो भाई। सरपंच का चुनाव पार्टी के निशान पर नहीं होता। इसलिए ये मत पूछना कि भाजपा जीती या कांग्रेस। लेकिन हकीकत ये है कि हर जीते हुए सरपंच के पीछे किसी न किसी पार्टी का हाथ होता ही है।
असली बड़ा फैसला 20 नवंबर को आएगा। उस दिन जिला परिषद और पंचायत समिति की गिनती होगी। तब पता चलेगा कि गांव में किसका पलड़ा भारी है।
कुल मिलाकर कल का दिन यही बता गया कि गांव वाले अब जाग गए हैं। महिलाएं आगे आ रही हैं, युवा आगे आ रहे हैं। और गांव वाले अपनी सरकार खुद चुनना चाहते हैं।
कुछ सवाल-जवाब
सवाल कल कितनी पंचायतों में वोट पड़े?
जवाब 27 जिलों की 3716 पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के लिए वोट पड़े।
सवाल सबसे बड़ी जीत किसकी हुई?
जवाब करौली के गुडला गांव में नैना धानका ने 1864 वोट से जीत हासिल की।
सवाल सीकर में क्या कमाल हुआ?
जवाब एक ही गांव की 3 बेटियों ने पहली बार चुनाव लड़ा और तीनों जीत गईं।
सवाल असली बड़ा रिजल्ट कब आएगा?
जवाब 20 नवंबर को जिला परिषद और पंचायत
समिति की गिनती होगी, तब असली तस्वीर साफ होगी।








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